शेयर बाजार के नुकसान: स्टॉक मार्केट में निवेश के क्या नुकसान है

शेयर बाजार के नुकसान: स्टॉक मार्केट में निवेश के क्या नुकसान है

ऐतिहासिक दृष्टि से देखा जाए तो स्टॉक मार्केट निवेशकों के लिए अनेकों बार फायदेमंद सिद्ध हुई है। परंतु अनेकों बार इसने अपने निवेशकों को निराश भी किया है। मार्केट में निवेशकों द्वारा शेयर खरीदे एवं बेचे जाते हैं, लाभ अर्जित एवं जोखिम सहन किए जाते हैं। आज के इस पोस्ट में हम शेयर बाजार के नुकसान पर चर्चा करेंगे हम देखेंगे कि यहां पर निवेश करने से आपको किस प्रकार के नुकसान झेलने पड़ सकते हैं।

वैश्विक स्तर पर होने वाले तुच्छ परिवर्तन भी भारतीय स्टॉक मार्केट को अस्त व्यस्त कर सकते हैं एवं निवेशक को अन्य भरोसेमंद विकल्प पर विचार-विमर्श के लिए विवश कर सकते हैं। इस लेख में हम स्टॉक मार्केट से संबंधित उन सभी विषयों पर विस्तार पूर्वक चर्चा करेंगे जिनके कारण स्टॉक मार्केट में गिरावट आती है एवं स्टॉक मार्केट में निवेश के क्या नुकसान है।

शेयर बाजार के नुकसान

शेयर बाजार के नुकसान

  • आकस्मिक जोखिम: आकस्मिक जोखिम का अर्थ है वह आपातकालीन स्थिति जब निवेशक पूर्व में खरीदी गई सिक्योरिटी को बेचता है। निवेशक की स्थिति और अधिक दयनीय हो जाती है जब उसके द्वारा यह सिक्योरिटी स्टॉक मार्केट की मंदी के हालातों में बेची जाती है।
  • अधिनियम संबंधित जोखिम: सरकार द्वारा अनेकों उद्योगों पर विभिन्न प्रकार के अधिनियम जारी किए गए हैं जो उन कंपनियों के लिए जोखिम पूर्ण है उदाहरण के तौर पर कॉल, बेवरेजेस, शुगर, सिगरेट, पेपर, केमिकल, ड्रग्स एंड फार्मास्यूटिकल्स इत्यादि।
  • अर्थव्यवस्था से संबंधित जोखिम: किसी भी कंपनी पर उससे संबंधित अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। अनेकों कारक जैसे आर्थिक विकास, ब्याज दरें, बीओपी एवं मुद्रास्फीति आदि स्टॉक मार्केट के किसी भी प्रकार के प्रदर्शन के लिए निर्णायक सिद्ध होती है।
  • अधिक समय की आवश्यकता: किसी कंपनी में निवेश करने से पूर्व निवेशक को स्टॉक मार्केट से संबंधित सभी पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता होती है जिसके लिए अधिकाधिक समय प्रदान करना होता है। यह हर निवेशक के लिए संभव नहीं है जिसके परिणाम स्वरूप निवेशक को जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। यदि निवेशक अपने जोखिम को सीमित करना चाहते हैं तो उन्हें निवेश करने से पूर्व स्टॉक मार्केट का विश्लेषण करना चाहिए एवं उस विश्लेषण के आधार पर ही निवेश करना चाहिए। निवेशक को स्टॉक मार्केट एवं स्टॉक प्राइस पर भी नजर रखनी चाहिए क्योंकि यह निरंतर गतिशील एवं परिवर्तनशील है। निवेशक को कंपनी के वित्तीय विवरण का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, निवेशक को उन सभी कंपनियों का निरंतर विश्लेषण करते रहना चाहिए जिनमें वे निवेश के इच्छुक हैं।
  • अनुभव एवं ज्ञान की कमी: स्टॉक मार्केट में ऐसे अनेकों निवेशक मौजूद हैं जिनके पास निवेश करने के लिए धन तो है परंतु अनुभव एवं ज्ञान की कमी है। वे केवल शौकिया तौर पर स्टॉक मार्केट में निवेश करना चाहते हैं जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें भारी जोखिम का सामना भी करना पड़ सकता है।
  • अस्थिरता: स्टॉक मार्केट निरंतर गतिशील एवं परिवर्तनशील होने के कारण स्टॉक की कीमतों में अप्रत्याशित एवं निरंतर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं जिसके परिणाम स्वरूप निवेशकों को गंभीर परिणाम एवं जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।
  • कर द्वारा जोखिम: किसी भी कंपनी पर लगने वाले कर उसे महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करते हैं। यदि करो में बढ़ोतरी होती है तो वह स्टॉक मूल्य को प्रभावित करते हैं। वे कंपनियां जिनके कर की दर अन्य कंपनियों की अपेक्षाकृत पहले से ही अधिक है, यदि उनके करों में वृद्धि होती है तो यह निवेशकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती हैं।
  • डीआईआई/एफआईआई: डीआईआई (डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर) एवं एफआईआई (फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर) स्टॉक मार्केट में अहम भूमिका निभाते हैं। इनके द्वारा स्टॉक मार्केट में निवेश अथवा विनिवेश स्टॉक मार्केट को अनुकूल या प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।
  • निवेश का केंद्रीयकरण: विविधीकरण में अनेकों वित्तीय साधनों का उपयोग किया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप यदि एक वित्तीय साधन किसी एक निश्चित अवधि में अच्छा प्रदर्शन न कर रहा हो तो कोई अन्य वित्तीय साधन उसी निश्चित अवधि में अच्छे प्रदर्शन द्वारा निवेशक के जोखिमों को सीमित करता है। इसके विपरीत केंद्रीयकरण में केवल एक ही वित्तीय साधन का उपयोग किया जाता है जिसके परिणाम स्वरूप यदि वह वित्तीय साधन अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है तो उस स्थिति में जोखिम सीमित करने के लिए कोई अन्य विकल्प उपलब्ध नहीं होता है।
  • प्रतिस्पर्धा: स्टॉक मार्केट में ऐसे अनेकों व्यवसायिक निवेशक एवं संस्थागत निवेशक मौजूद हैं जिनके पास असीमित ज्ञान एवं अनुभव है। वे स्टॉक मार्केट में प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करते हैं। प्रतिस्पर्धा एवं जोखिम से परिपूर्ण स्टॉक मार्केट में नए एवं अनुभवहीन निवेशकों को लाभ अर्जित करने के लिए माध्यमों को ढूंढना चाहिए एवं अपनाना चाहिए।
  • ब्रोकरेज एवं मार्जिन: स्टॉक मार्केट में निवेशकों द्वारा स्टॉक खरीदने और बेचने के लिए ब्रोकरेज शुल्क का भुगतान किया जाता है इसलिए निवेशकों को ब्रोकरेज शुल्क की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। यदि निवेशकों को सामान्य से अधिक ब्रोकरेज शुल्क लागू हो रहा हो तो यह उनके लाभ मार्जिन को कम करता है। हमेशा अपना डीमैट अकाउंट अच्छे स्टॉक ब्रोकर के साथ होना चाहिए।
  • ब्याज दर संबंधी जोखिम: स्टॉक मार्केट पर लागू होने वाली ब्याज दरों में निरंतर परिवर्तन आते रहते हैं। ब्याज दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी बॉन्ड के मूल्यों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है। अत्यधिक ब्याज दरों के परिणाम स्वरुप बॉन्ड के मूल्य में गिरावट देखी जाती है क्योंकि इस स्थिति में निवेशक बॉन्ड द्वारा प्राप्त होने वाली निम्न दर में निवेश नहीं करते हैं।
  • भरपूर उतार-चढ़ाव: स्टॉक मार्केट निरंतर गतिशील एवं परिवर्तनशील होने के कारण स्टॉक की कीमतों में निरंतर उतार-चढ़ाव आते रहते हैं इसलिए निवेशक को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कब स्टॉक खरीदना है एवं कब स्टॉक बेचना है। आमतौर पर निवेशक लोभ के कारण खरीदते हैं एवं भय के कारण बेचते हैं। नए निवेशक स्टॉक खरीदने के लिए कीमतों में और अधिक गिरावट की प्रतीक्षा करते हुए खरीदने के विकल्प से एवं स्टॉक बेचने के लिए इनकी कीमतों में और अधिक उछाल की प्रतीक्षा करते हुए संभावित लाभ अर्जित करने के विकल्प से भी बाहर हो जाते हैं। निवेशक को अपने स्टॉक की कीमतों की नियमित आधार पर जांच करते रहना चाहिए।
  • राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्थितियां: स्टॉक मार्केट पर अनेकों बार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का प्रभाव देखने को मिला है उदाहरण के तौर पर अराजकता, चुनाव एवं राजनीतिक उथल-पुथल आदि।
  • रेटिंग: स्टॉक मार्केट में मौजूद सभी कंपनियों के स्टॉक का विश्लेषण किया जाता है एवं उसके आधार पर उन्हें रेटिंग प्रदान की जाती है जिसका प्रभाव इस कंपनी के स्टॉक की खरीद-फरोख्त पर अनुकूल या प्रतिकूल रूप में दिखाई देता है।
  • वित्तीय स्थिति: किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले निवेशक को कंपनी की वित्तीय स्थिति की संपूर्ण जानकारी होनी चाहिए। यदि कंपनी की वित्तीय स्थिति दयनीय हो और अपनी देनदारियों को चुकाने में सक्षम ना हो तो इस प्रकार की कंपनी में निवेश करना जोखिमपूर्ण सिद्ध हो सकता है।
  • व्यापारिक जोखिम: किसी भी कंपनी के प्रबंधन का है असफल हो जाना या निरंतर खराब प्रदर्शन दिखाना व्यापारिक जोखिम के अंतर्गत आता है। इस प्रकार की कंपनी का चुनाव निवेशकों के लिए जोखिम पूर्ण हो सकता है।
  • स्टॉक मार्केट संबंधित जोखिम: दीर्घकालिक निवेश की अपेक्षाकृत अल्पकालिक निवेश अत्यधिक जोखिम पूर्ण होते हैं। स्टॉक मार्केट में प्रतिदिन अनेकों उतार-चढ़ाव आते हैं जिसका किसी भी कंपनी पर अनुकूल या प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। स्टॉक मार्केट में गिरावट के परिणाम स्वरूप अनेकों सफल प्रदर्शन कर रहे स्टॉक में भी गिरावट देखी जा सकती है। मार्केट जोखिम को सिस्टमैटिक जोखिम भी कहा जाता है एवं यह मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं जैसे इक्विटी जोखिम, इंटरेस्ट रेट जोखिम एवं करेंसी जोखिम।
  • स्टॉक होल्डर्स का भुगतान: किसी भी कंपनी के दिवालिया होने की स्थिति में स्टॉक होल्डर्स का भुगतान प्रेफरर्ड शेयरहोल्डर्स, बॉन्डहोल्डर्स एवं क्रेडिटरर्स के बाद किया जाता है।
  • मुद्रा विनिमय दर द्वारा जोखिम: स्टॉक मार्केट में वे कंपनियां जिनके द्वारा वैश्विक स्तर पर निवेश किया जाता है उन कंपनियों के साथ हमेशा मुद्रा विनिमय दर का जोखिम बना रहता है। यदि मुद्रा विनिमय दर में गिरावट आती है यह कंपनियों को प्राप्त होने वाले रिटर्न में गिरावट दर्शाता है।
  • मुद्रास्फीति संबंधित जोखिम: किसी भी कंपनी को प्राप्त होने वाले रिटर्न यदि मुद्रास्फीति दर से कम हो तो इसका यह अर्थ है कि उस कंपनी की वित्तीय स्थिति दयनीय है एवं उस कंपनी में निवेश जोखिम पूर्ण सिद्ध हो सकता है।
  • कर द्वारा जोखिम: किसी भी कंपनी पर लगने वाले कर उसे महत्वपूर्ण ढंग से प्रभावित करते हैं। यदि करो में बढ़ोतरी होती है तो वह स्टॉक मूल्य को प्रभावित करते हैं। वे कंपनियां जिनके कर की दर अन्य कंपनियों की अपेक्षाकृत पहले से ही अधिक है, यदि उनके करों में और अधिक वृद्धि हो तो यह निवेशकों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करती है।
  • ब्याज दर संबंधी जोखिम: स्टॉक मार्केट पर लागू होने वाली ब्याज दरों में निरंतर परिवर्तन आते रहते हैं। ब्याज दरों में किसी भी प्रकार की बढ़ोतरी स्टॉक मार्केट को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है। अत्यधिक ब्याज दरों के परिणाम स्वरुप कंपनियों द्वारा प्रदान किए जाने वाले बॉन्ड के मूल्य में गिरावट देखने को मिलती है।
  • राष्ट्रीयकरण संबंधित जोखिम: जब निवेशकों द्वारा विदेशी स्टॉक में निवेश किया जाता है उस स्थिति में निवेशकों द्वारा राष्ट्रीयकरण संबंधित जोखिम का सामना करना पड़ता है। इस प्रकार के जोखिम निवेशक के साथ निहित होते हैं, ये उस देश में विद्यमान नहीं होते हैं।
  • लिक्विडिटी संबंधित जोखिम: स्टॉक मार्केट लिक्विडिटी संबंधित जख्मों से परिपूर्ण है। यह संभव नहीं है कि निवेशक को अपने निवेश के एवज में उचित समय पर सही मूल्य प्राप्त हो। अनेक मामलों में तो निवेशक को अपने निवेश को बेचने संबंधित अधिकार भी प्राप्त नहीं होते हैं।
  • ऋणधारक की अदायगी: स्टॉक मार्केट में जिन कंपनियों द्वारा निवेशकों को बॉन्ड जारी किए जाते हैं यदि वे उन निवेशकों को उचित समय पर मूल अथवा ब्याज प्रदान नहीं करते हैं तो यह निवेशकों के लिए जोखिम पूर्ण सिद्ध हो सकता है।
  • पुनर्निवेश संबंधित जोखिम: पुनर्निवेश जोखिम का अर्थ है निवेशक द्वारा वर्तमान ब्याज दर से निम्न ब्याज दर पर निवेश किया जाता है। इस प्रकार के जोखिम मुख्यतः बॉन्ड निवेश में देखे जा सकते हैं।

पढ़े; Zerodha ट्रेडिंग अकाउंट कैसे खोलें

मैं व्यक्तिगत रूप से आपको डिजिटल गोल्ड में निवेश करने के लिए निम्नलिखित प्लेटफार्मों में खाता खोलने की सलाह देता हूं:

निष्कर्ष: शेयर बाजार में निवेश अनेकों प्रकार से जोखिम पूर्ण है परंतु इससे यह अभिप्राय नहीं है कि स्टॉक मार्केट में निवेश नहीं करना चाहिए। इस लेख का मुख्य उद्देश्य निवेशक को यह समझाना है कि स्टॉक मार्केट में निवेश शांत स्वभाव के साथ किया जाना चाहिए। स्टॉक मार्केट में निवेश करने से पहले निवेशक को स्टॉक मार्केट से संबंधित फायदे एवं नुकसान की जानकारी, सर्वोत्तम रणनीति एवं विशेषज्ञ की सलाह उपलब्ध होनी चाहिए जो निवेशक के पक्ष में अच्छे परिणाम प्रदान करें।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा.